ट्रेडिंग में प्रॉफिट को सुरक्षित रखने और रिस्क को कम करने के लिए ट्रेलिंग स्टॉप लॉस (Trailing Stop Loss) एक बहुत ही प्रभावी टूल माना जाता है। खासकर प्राइस एक्शन ट्रेडिंग में यह रणनीति ट्रेडर को बड़े ट्रेंड का फायदा उठाने में मदद करती है।
इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि ट्रेलिंग स्टॉप लॉस क्या है, यह कैसे काम करता है, और इसे सही तरीके से कैसे उपयोग करें।
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस क्या होता है?
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस एक ऐसा डायनामिक स्टॉप लॉस है जो मार्केट की दिशा में अपने आप आगे बढ़ता है, लेकिन मार्केट के उलट जाने पर वहीं रुक जाता है।
ट्रेडिंग या इन्वेस्टिंग में कमाई करने के लिए अक्सर ऐसा कहा जाता है कि व्यक्ति को नुकसान को मर्यादित करने को और मुनाफे को बढ़ाने को सिखना चाहिए। साथ ही यह सलाह भी दी जाती है कि आपके मुनाफे को कभी भी नुकसान में न बदलने दें। ऐसा करने के लिए आपको ट्रेलिंग स्टॉप लॉस के कन्सेप्ट का उपयोग करने की आवश्यकता है।
- प्राइस रिजेक्शन और प्राइस एक्सेप्टेंस क्या है?
- ट्रेडिंग में रिस्क मैनेजमेंट क्या होता है?
- ट्रेडिंग में पोजीशन साइजिंग क्या है?
- इनिशियल स्टॉप लॉस क्या है और इसका उदाहरण क्या है?
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस आपके नुकसान को घटाने और मुनाफे को सुरक्षित करने का कन्सेप्ट है। उसमें जब तक भाव आपके हित में आगे बढ़ता है, तब तक ट्रेडिंग पोजिशन को ओपन रखा जाता है।
जैसे कि ऊपर उल्लेख किया है, ट्रेलिंग स्टॉप लॉस दो उद्देश्यों को पूरा करता है। सबसे पहले, वह पूँजी के नुकसान से रक्षण करता है। दुसरा, वह आपके मुनाफे को भी सुरक्षित करता है, जिससे आपका नोशनल प्रॉफिट (काल्पनिक मुनाफा) वास्तविक मुनाफे में बदल जाता है।
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस अपने आप सिक्योरिटी के भाव की दिशा में ट्रेल करता है और उसे स्टॉप लॉस ऑर्डर की तरह मॅन्युअली रीसेट करने की जरूरत नहीं।
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस के कन्सेप्ट को आसानी से समझने के लिए हम एक उदाहरण देखते है। मान लीजिए कि आपने किसी सिक्योरिटी में रू.१०० के भाव से लाँग पोजिशन ली है और उसमें रू.९० का स्टॉप लॉस और रू. १३० का टारगेट रखा है।
अब मान लीजिए कि भाव आपकी दिशा में आगे बढ़ा और रू.११० हुआ। ऐसे में आप अपने स्टॉप लॉस को रू.९० से बढ़ाकर रू. १०० करते है।
मान लीजिए कि भाव और भी आगे बढ़ा और रू.१३० हुआ। ऐसे में आप अपने स्टॉप लॉस को रू.१०० से बढ़ाकर रू.१२० करते है। आपने ट्रेड की शुरूआत में रू.१३० का टारगेट निश्चित किया था, लेकिन अब भाव उस स्तर पर पहुँच गया फिर भी आप मुनाफा बुक नहीं करते, लेकिन अपना ट्रेलिंग स्टॉप लॉस बढ़ाते जाते है।
अब मान लीजिए कि भाव रू. १५० हुआ। अब आपका ट्रेलिंग स्टॉप लॉस रू.१४० हो जाता है। इस प्रकार से आप अपना ट्रेलिंग स्टॉप लॉस बढ़ाते जाते है और जब भी करेक्शन आता है और भाव आपके ट्रेलिंग स्टॉप लॉस को हिट करता है तभी आप अपनी पोजिशन एक्झिट करते है।
सरल शब्दों में कहें तो, लॉंग पोजिशन के मामले में, ट्रेलिंग स्टॉप लॉस वर्तमान बाज़ार भाव से नीचे लगाया जाता है और भाव जैसे-जैसे बढ़ता है, वैसे-वैसे ट्रेलिंग स्टॉप लॉस भी बढ़ते जाता है।
नीचे दिए गए चार्ट में यही कन्सेप्ट उदाहरण के द्वारा समझाने का प्रयास किया है।
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| ट्रेलिंग स्टॉप लॉस |
अब मान लीजिए कि आपने किसी सिक्योरिटी में रू.५०० के भाव से शॉर्ट पोजिशन ली है और उसमें रू.५२० का स्टॉप लॉस और रू.४२५ का टारगेट रखा है।
मान लीजिए कि भाव आपकी दिशा में घटा और रू.४८० हुआ। ऐसे में आप अपने स्टॉप लॉस को रू.५२० से घटाकर रू.५०० करते है।
मान लीजिए कि भाव और ज्यादा घटकर रू.४५० हुआ। ऐसे में आप अपना स्टॉप लॉस को रू.५०० से घटाकर रू.४७० करते है। आपने ट्रेड की शुरूआत में रू.४२५ का टारगेट निश्चित किया था, लेकिन अब भाव उस स्तर पर पहुँच गया फिर भी आप मुनाफा बुक नहीं करते, लेकिन अपना ट्रेलिंग स्टॉप लॉस घटाते जाते है।
अब मान लीजिए कि भाव घटकर रू.३८० हुआ। अब आपका ट्रेलिंग स्टॉप लॉस रू.४०० हो जाता है। इस प्रकार से आप अपने ट्रेलिंग स्टॉप लॉस को घटाते जाते है और जब भी पुलबैक रैली आती है और भाव आपके ट्रेलिंग स्टॉप लॉस को हिट करता है तभी आप अपनी पोजिशन एक्झिट करते है।
सरल शब्दों में कहें तो, शॉर्ट पोजिशन के मामले में, ट्रेलिंग स्टॉप लॉस वर्तमान बाज़ार भाव से ऊपर लगाया जाता है और भाव जैसे-जैसे घटता है वैसे-वैसे ट्रेलिंग स्टॉप लॉस भी घटते जाता है।
नीचे गए दिए चार्ट में इस कन्सेप्ट को उदाहरण द्वारा समझाने का प्रयास किया है।
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| ट्रेलिंग स्टॉप लॉस |
सैद्धांतिक रूप से इनिशियल स्टॉप लॉस के समान, ट्रेलिंग स्टॉप लॉस को भी कई स्ट्रैटजीज़ का उपयोग करके लगाया जा सकता है। लेकिन वास्तविक रूप से आपके ब्रोकर के ट्रेडिंग सिस्टम में ट्रेलिंग स्टॉप लॉस लगाने के लिए आपके पास दो ही विकल्प होते है प्रतिशतता के रूप में ट्रेल करें या एब्सोल्यूट वॅल्यू (रूपए) के रूप में ट्रेल करें।
- प्राइस एक्शन क्या है और इससे ट्रेडिंग कैसे करें?
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- सपोर्ट और रेजिस्टेंस रिवर्सल क्या है?
- राइजिंग सपोर्ट (Rising Support) क्या है?
निष्कर्ष
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस एक स्मार्ट रिस्क मैनेजमेंट टूल है जो ट्रेडर को प्रॉफिट सुरक्षित रखने और बड़े ट्रेंड का फायदा लेने में मदद करता है। सही गैप चुनना और मार्केट की स्थिति को समझना बहुत जरूरी है।
अगर आप प्राइस एक्शन ट्रेडिंग सीख रहे हैं, तो ट्रेलिंग स्टॉप लॉस आपकी स्ट्रेटेजी का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
FAQs
❓ क्या ट्रेलिंग स्टॉप लॉस ऑटोमैटिक होता है?
हाँ, अधिकांश ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर यह ऑटोमैटिक सुविधा उपलब्ध होती है।
❓ क्या यह शुरुआती ट्रेडर्स के लिए सही है?
हाँ, लेकिन सही दूरी तय करना सीखना जरूरी है।
❓ क्या ट्रेलिंग स्टॉप लॉस से नुकसान हो सकता है?
अगर गलत सेटिंग की जाए तो हाँ, इसलिए सही स्ट्रेटेजी जरूरी है।
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