ट्रेडिंग जर्नल क्या है? कैसे बनाएं | What is a trading journal? How to create one.

ट्रेडिंग में सफलता केवल स्ट्रेटेजी से नहीं मिलती, बल्कि डिसिप्लिन, रिकॉर्ड-कीपिंग और निरंतर सुधार से मिलती है। यही कारण है कि एक ट्रेडिंग जर्नल (Trading Journal) हर प्रोफेशनल ट्रेडर का सबसे महत्वपूर्ण टूल होता है।

अगर आप लगातार लॉस से परेशान हैं या अपनी परफॉर्मेंस सुधारना चाहते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है।

ट्रेडिंग जर्नल ट्रेडिंग परफॉरमन्स मैनेजमेन्ट के लिए सबसे प्रभावी टूल है। यह ट्रेडर को निरंतर अच्छा प्रदर्शन करने और मुनाफा कमाने में मदद करता है।


ट्रेडिंग जर्नल आपकी 'डायरी' की तरह है, जिसमें आप अपने सभी ट्रेडिंग एक्टिविटीज़ का रेकॉर्ड रखते है। एक विस्तृत जर्नल मेन्टेन करने से ट्रेड रिझल्ट्स का एनालिसिस करने में आसानी होती है और कौन से ट्रेड ने कैसे काम किया और कौन से ट्रेड में कितना नुकसान हुआ, इसका अंदाजा भी तुरंत मिलता है।


आपके जर्नल में आपने ट्रेड किए सिक्योरिटीज़, एन्ट्री लेवल, स्टॉप लॉस और टारगेट, पोजिशन साइज, रिस्क रिवॉर्ड रेशिओ, आप ट्रेड में सफल हुए या नहीं, मार्केट की स्थिति ट्रेड के समय कैसी थी, आदि डेटा का समावेश कर सकते है। इसके अलावा, आप अपनी भावनात्मक बातों का उल्लेख भी उसमें कर सकते है।


ट्रेडिंग जर्नल आपको ट्रेडिंग में की गई गलतियों को ढूँढने में मदद करता है, जिससे भविष्य में आप उन गलतियों को करने से बच सकते है और अपनी ट्रेडिंग स्ट्रैटजी को सुधारने के लिए उसका फाइन-ट्युनिंग भी कर सकते है।

ट्रेडिंग जर्नल मेन्टेन करने के कुछ प्रमुख फायदें 

  • यह ट्रेडिंग में आपकी ताकत और कमजोरियों को जानने में मदद करता है।
  • यह विनिंग ट्रेड लगातार बढ़ाकर आपके ट्रेडिंग परफॉरमन्स को बेहतर बनाने में मदद करता है।
  • यह आपकी ट्रेडिंग एक्टिविटी की जिम्मेदारी निश्चित करने के लिए वह मदद करता है।
  • आपको तय करने में मदद करता है कि आपके लिए कौन सी ट्रेडिंग स्ट्रैटजी अच्छी है।
  • यह आपको एक ही गलती को बार बार दोहराने से रोकता है।

ट्रेडिंग जर्नल में नोट करने लायक प्रमुख बातें

आपके ट्रेडिंग जर्नल में जो प्रमुख बातें होनी चाहिए, उन्हें नीचे दर्शाया गया है। आपको इन सभी बातों का समावेश करना है, ऐसा जरूरी नहीं।

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ट्रेडिंग जर्नल

आप अपने ट्रेडिंग स्टाईल के अनुसार अपना ट्रेडिंग जर्नल तैयार कर सकते हैं।


1. तारीख और समय : जर्नल में प्रत्येक एन्ट्री की तारीख और समय को खास लिखना चाहिए, जिससे आपने कौन से ट्रेड में कब पोजिशन ली थी, यह पता चल सकें।


2. ट्रेडेड इन्स्ट्रूमेन्ट  : आपने किस फाइनान्शियल इन्स्ट्रूमेन्ट में ट्रेड किया है, उसकी जानकारी यहाँ पर देनी है। जैसे कि स्टॉक, करन्सी, कमोडिटी, इन्डेक्स, डेरिवेटिव कॉन्ट्रॅक्ट आदि।


3. ट्रेड की दिशा : यहाँ पर आप ट्रेड की दिशा को दर्शाते है, अर्थात आपने किसी ट्रेड में लाँग पोजिशन ली है या शॉर्ट पोजिशन ली है, उसे दर्शाता है।


4. प्राइस पॉइन्ट : प्राइस पॉइन्ट में तीन अलग अलग फिल्ड को दर्शाया जा सकता है - एन्ट्री प्राइस, स्टॉप लॉस और एक्झिट प्राइस।


5. पोजिशन साइज : यहाँ पर आप अपने ट्रेड की पोजिशन साइज को दर्शाते है।


6. रिस्क रिवॉर्ड :  रेशिओ यहाँ पर आप अपने ट्रेड का रिस्क रिवॉर्ड रेशिओ दर्शाते है। यदि आप अपने ट्रेडिंग जर्नल के लिए एक्सेल स्प्रेडशीट का उपयोग करते हो तो उसमें आप प्राइस पॉइन्ट एन्टर करते हो तो अपनेआप रिस्क रिवॉर्ड रेशिओ की गणना हो सकती है। यह डेटा आपको बाद में एनालिसिस करने में मदद करता है कि क्या आपने घाटे वाले ट्रेड में बहुत अधिक जोखीम उठाया था या मुनाफे वाले ट्रेड में बहुत काम जोखीम उठाया था।


7. ट्रेड रिझल्ट : यहाँ पर आप दर्शाते है कि पोजिशन स्क्वेअर-ऑफ करने के बाद आपको कितना मुनाफा या नुकसान हुआ।


8. चार्ट : कुछ प्रोफेशनल ट्रेडर्स या जो ट्रेडिंग जर्नल मेन्टेन करने के लिए एक्सेल या अन्य इलेक्ट्रॉनिक इन्स्ट्रूमेन्ट का उपयोग करते है, वह प्रत्येक ट्रेड के लिए प्राइस चार्ट भी दर्शाते है। जब समय होता है तब वह इस चार्ट का अभ्यास करते है और अपने ट्रेड का एनालिसिस करते है।


9. एडिशनल नोट्स : आप अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप, अपने ट्रेडिंग जर्नल में एडिशनल इन्फॉर्मेशन भी सामील कर सकते है, जैसे कि आपने कोई ट्रेड क्यों लिया, उस ट्रेड के समय मार्केट की स्थिति कैसी थी, कौन सी खबर का आपके ट्रेड पर परिणाम हुआ, आदि।

ट्रेडिंग जर्नल को तैयार करना 


ट्रेडिंग जर्नल को बनाना बहुत ही आसान है। इसे बनाने के दो विकल्प है आप आपनी सभी ट्रेडिंग एक्टिविटी और उससे संबंधित जानकारी को एक फिजिकल डायरी में अपने हाथ से लिखें अथवा एक्सेल स्प्रेडशीट में ईलेक्ट्रॉनिक स्वरूप में डेटा मेन्टेन करें।


इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप एक्सेल पर आधारित ट्रेडिंग जर्नल मेन्टेन करते हो या फिजिकल डायरी में हाथ से लिखकर मेन्टेन करते है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने प्रत्येक ट्रेड की जानकारी को अपने जर्नल में सामील करें और वह भी प्रतिदिन। यदि आप ढंग से अपने ट्रेडिंग जर्नल में आपके सभी रेकॉर्ड को नोट करने से चूक गए तो आपका ट्रेडिंग परफॉरमन्स कैसा था, यह आपको पता नहीं चलेगा।


कई लोग ट्रेडिंग जर्नल बनाना शुरू तो करते है, लेकिन कुछ दिनों के बाद वह जर्नल मेन्टेन करने की प्रक्रिया बंद करते है। यदि आप ट्रेडिंग में नए हो, तो शुरूआत में ट्रेडिंग जर्नल मेन्टेन करना उबाऊ और समय लेने वाला लगता है। लेकिन मेरा विश्वास कीजिए, अपने प्रत्येक ट्रेड को रेकॉर्ड करना आपको कन्सिस्टन्सी और डिसिप्लिन सिखाता है, जिससे दिर्घावधी में आपको ट्रेडिंग में अच्छा फायदा होगा।


हमेशा याद रखें कि, केवल ट्रेडिंग जर्नल मेन्टेन करना काफी नहीं। आपको अपनी गलतियों के बारे में जानने के लिए अपनी ट्रेडिंग गतिविधि की निगरानी करनी होगी जिसके लिए आपको अपने ट्रेडिंग जर्नल की लगातार समीक्षा करनी होगी। ऐसा करने से आप एक ही गलती को बार बार दोहराने से बच सकते है।

निष्कर्ष

अगर आप सच में ट्रेडिंग में सफल होना चाहते हैं, तो ट्रेडिंग जर्नल रखना अनिवार्य है। यह आपकी गलतियों को कम करता है, स्ट्रेटेजी को मजबूत बनाता है और आपको एक प्रोफेशनल ट्रेडर में बदल देता है।

FAQs

Q1. क्या छोटे अकाउंट वाले ट्रेडर को भी जर्नल बनाना चाहिए?

हाँ, जर्नल अकाउंट साइज से नहीं बल्कि मानसिकता से जुड़ा है।

Q2. क्या रोज जर्नल अपडेट करना जरूरी है?

हाँ, हर ट्रेड के बाद अपडेट करना चाहिए।

Q3. क्या मोबाइल पर जर्नल बना सकते हैं?

हाँ, Google Sheets या Notes App में आसानी से बना सकते हैं।

Q4. जर्नल रखने से कितने समय में सुधार दिखता है?

अगर नियमित रिव्यू करें तो 1–3 महीनों में फर्क दिखने लगता है।

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