शेयर बाजार में मार्केट सायकल क्या होता है? | What is a market cycle in the stock market?

मार्केट सायकल यानी किसी भी सिक्योरिटी (स्टॉक, बॉन्ड, कमोडिटी, करन्सी आदि) के मामले में दो नवनीतम ऊपरी अथवा नीचले स्तर के बीच की कालावधी को दर्शाता है। सरल शब्दों में कहें तो वह किसी भी सिक्योरिटी के उतार-चढ़ाव के चरण को दर्शाता है।


शेअर्स हो या कोई सिक्योरिटी, उनके भाव में अक्सर उतार-चढ़ाव होता है। इसलिए उनमें ट्रेडिंग करने वाले ट्रेडर्स इस उतार-चढ़ाव के पैटर्न को जानने में रूचि रखते है। जिसके आधार पर यह अनुमान लगाना संभव है कि निकट भविष्य में भाव बढ़ेगा या घटेगा। इस प्राइस पैटर्न को मार्केट के चरण अर्थात स्टेजेस ऑफ मार्केट के नाम से भी जाना जाता है।


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मार्केट सायकल


एक प्रसिद्ध कहावत है जो ट्रेडिंग पर लागू होती है "हम हवा की दिशा बदल नहीं सकते, लेकिन हम अपने जहाज के पाल को हवा की दिशा में मोड़ सकते हैं" एक अच्छा नाविक हवा की दिशा के अनुसार अपनी नाव को दिशा देता है और अपने लक्ष्य तक पहुँचता है। इस तरह से बाज़ार के विभिन्न चरणों को समझकर और भाव किस प्रकार से बढ़ता और घटता है उसका अंदाजा लगाकर ट्रेडर ट्रेडिंग के नए मौके ढूंढ सकता है और अपने ट्रेडिंग रिस्क को कम कर सकता है। इसलिए, आगे बढ़ने से पहले बाज़ार के इन विभिन्न चरणों को जान लेना महत्वपूर्ण है।


यदि ट्रेडर बाज़ार के प्रत्येक चरण को पहचानकर और समझकर उसके अनुसार अपने ट्रेडिंग स्टाईल में बदलाव करता है तो वह निश्चित रूप से ट्रेडिंग में अच्छी कमाई कर सकता है।


मार्केट में ऐसा नज़र आता है कि ट्रेडर्स एक निश्चित अवधि में एक निश्चित तरह का बर्ताव करते है और उसके अनुसार ही वह ट्रेडिंग करते है। बाज़ार के महत्वपूर्ण चरणों के आधार पर यह व्यवहार पता चलता है। इसलिए, मार्केट के स्ट्रक्चर का अध्ययन कर, ज्यादातर लोग किस तरह से सिक्योरिटीज़ में ट्रेडिंग कर रहे है वह पता चलता है।

मार्केट सायकल के प्रमुख 4 चरण :


मार्केट सायकल मुख्य रूप से चार चरणों से गुजरता है, वह इस प्रकार है :

  1. एक्युम्युलेशन फेज (Accumulation Phase)
  2. एडवान्सिंग फेज (Advancing Phase)
  3. डिस्ट्रिब्युशन फेज (Distribution Phase)
  4. डिक्लाइनिंग फेज (Declining phase)

मार्केट के इन चारों चरणों को नीचे की आकृति में दर्शाया गया है, जिससे उन्हें बेहतर ढंग से समझा जा सकता है। यह चरण संपूर्ण मार्केट, इन्डेक्स या किसी भी सिक्योरिटी को लागू होते है।


अब हम इन सभी चरणों को विस्तार से समझते है।

1. एक्युम्युलेशन फेज -


एक्युम्युलेशन फेज या स्टेज किसी भी मार्केट सायकल का सबसे पहला चरण होता है। यह चरण तब आता है जब सिक्योरिटी अपने पिछले डिक्लाइनिंग चरण को पूरा करने के बाद कन्सॉलिडेशन फेज से गुजरती है। इस चरण के दरम्यान लोग उन शेअर्स को तब एक्युम्युलेट करते जाते है जब वह एक निश्चित रेन्ज में ट्रेड करते है।


इस चरण को 'बेझिंग पीरियड' के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि वह डाउनट्रेन्ड के बाद और अपट्रेन्ड से पहले नज़र आता है।


इस चरण की महत्वपूर्ण बात यह है कि उसमें ट्रेडिंग का वॉल्यूम अधिक होता है, लेकिन भाव बढ़ता नहीं।

एक्युम्युलेशन फेज के लक्षण :


वह दर्शाता है कि सिक्योरिटी में स्ट्रेन्थ बढ़ रही है।


सिक्योरिटी निश्चित ट्रेडिंग रेन्ज में ट्रेड होने लगी है और कन्सॉलिडेशन के अपर और लोअर बॅन्ड के बीच घूम रही है। एक्युम्युलेशन फेज में मार्केट पार्टिसिपेन्ट्स सिक्योरिटी में बुलिश होने लगे है।


भाव निश्चित रेन्ज में घूमने लगता है और संकेत देता है कि अब सिक्योरिटी में बॉटम का निर्माण होने लगा है।


यह चरण संकेत देता है कि खरीदार और विक्रेताओं में जोरदार लड़ाई चल रही है और अंत में खरीदारों की संख्या विक्रेताओं कि तुलना में अधिक हो जाती है।

2. एडवान्सिंग फेज


सिक्योरिटी एक्युम्युलेशन फेज से बाहर आने के बाद एडवान्सिंग फेज में प्रवेश करती है, जो तेजी का ट्रेन्ड अधिक मजबूत होने का संकेत देता है।


यह चरण दर्शाता है कि अब ज्यादातर लोग इस सिक्योरिटी में बुलीश है।

एडवान्सिंग स्टेज के लक्षण :


सिक्योरिटी में जो मजबूती नज़र आई वह अधिक मजबूत होती है और ज्यादा से ज्यादा लोग उस सिक्योरिटी में लाँग साइड में एक्टिव होते है।


एक्युम्युलेशन फेज के रेन्ज से बाहर निकलने के बाद अब सिक्योरिटी का भाव बढ़ने लगता है।


इस तरह का ब्रेकआऊट सामान्यतः बड़े वॉल्यूम के साथ होता है, जो दर्शाता है कि जो ट्रेडर्स एक्युम्युलेशन फेज में चूपचाप बैठे थे वह अब आक्रमकता से सिक्योरिटी में खरीदी कर रहें है।


मार्केट पार्टिसिपेन्ट्स इस चरण में सिक्योरिटी में ज्यादा से ज्यादा बुलिश होते है।


इस चरण में सिक्योरिटी का भाव ज्यादा से ज्यादा ऊपर जाने लगता है। जिससे हायर हाई और हायर लो पैटर्न तैयार होता है।

3. डिस्ट्रिब्युशन फेज -


इस चरण में सिक्योरिटी अपना मोमेन्टम गँवाने लगती है और ट्रेडर्स उसमें प्रॉफिट बुक करने लगते है और अंत में यह दर्शाता है कि खरीदार उसमें से बाहर निकल रहे है और कई ट्रेडर्स सिक्योरिटी में शॉर्ट पोजिशन भी ले रहे है।


एक्युम्युलेशन फेज कि तरह इस फेज में सिक्योरिटी निश्चित रेन्ज में घुमती हुई नज़र आती है।

डिस्ट्रिब्युशन फेज के लक्षण :


पहले सिक्योरिटी में जो ताकत नज़र आ रही थी वह अब कमजोर पड़ने लगी है और लोग उसमें सतर्क होने लगे है।


एडवान्सिंग स्टेज पूरा होने के बाद सिक्योरिटी निश्चित रेन्ज में ट्रेड होने लगती है और कन्सॉलिडेशन के अपर बॅन्ड और लोअर बॅन्ड के बीच घूम रही है।


मार्केट पार्टिसिपेन्ट्स मुनाफा बुक करने लगते है और कई ट्रेडर्स उस सिक्योरिटी में शॉर्ट पोजिशन भी लेते है।


भाव निश्चित रेन्ज में घूमने लगता है और संकेत देता है कि अब उसमें टॉप बनाने की तैयारी हो रही है।


यह चरण संकेत देता है कि खरीदार और विक्रेताओं में जोरदार लड़ाई चल रही है और अंत में विक्रेताओं की संख्या खरीदारों से अधिक होती है।

4. डिक्लाइनिंग फेज -


सिक्योरिटी डिस्ट्रिब्युशन फेज से बाहर निकलने के बाद डिक्लाइनिंग फेज में प्रवेश करती है, जो मंदी का ट्रेन्ड अधिक मजबूत होने का संकेत देता है। यह चरण दर्शाता है कि अब ज्यादा से ज्यादा लोग उस सिक्योरिटी के बारे में बेअरीश है।


मार्केट सायकल का यह अंतिम चरण है और ज्यादातर निवेशकों के लिए वह अनुकूल नहीं होता।


यह चरण रिवर्सल फेज के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस चरण के दरम्यान जिन ट्रेडर्स ने पहले एक्युम्युलेशन फेज में खरीदी की अर्थात एन्ट्री ली थी वह इस चरण में एक्झिट लेने लगते है।


इस चरण की महत्वपूर्ण बात यह है कि भाव में गिरावट के साथ ट्रेडिंग वॉल्यूम में बढ़ोतरी नज़र आती है।

डिक्लाइनिंग फेज के लक्षण :


सिक्योरिटी में जो कमजोरी नज़र आई थी वह अधिक बढ़ती है और ज्यादा से ज्यादा लोग इस सिक्योरिटी में शॉर्ट साइड में एक्टिव होते है।


डिस्ट्रिब्युशन फेज के रेन्ज में से ब्रेकडाउन होने के बाद अब सिक्योरिटी का भाव गिरने लगता है।


सामान्यतः इस तरह का ब्रेकडाउन बड़े वॉल्यूम के साथ होता है, जो संकेत देता है कि जो ट्रेडर्स डिस्ट्रिब्युशन फेज के दरम्यान चुपचाप बैठे थे वह अब आक्रमक होकर बिक्री कर रहे है।


इस चरण में मार्केट पार्टिसिपेन्ट्स सिक्योरिटी में ज्यादा से ज्यादा बेअरीश होते है।


इस चरण में सिक्योरिटी का भाव लोअर लो और लोअर हाई बनाने लगता है।

निष्कर्ष

मार्केट सायकल को समझना हर ट्रेडर और निवेशक के लिए जरूरी है। अगर आप मार्केट के चारों चरणों को पहचानना सीख लेते हैं, तो आप बेहतर निर्णय ले सकते हैं और लॉस से बच सकते हैं।

धैर्य और अनुशासन के साथ मार्केट सायकल का उपयोग करना ही सफल निवेश की कुंजी है।

F&Q

Q1. मार्केट सायकल क्या होता है?

मार्केट सायकल शेयर बाजार के चार चरणों – Accumulation, Advancing, Distribution और Declining – की प्रक्रिया है, जिसमें बाजार समय के साथ ऊपर और नीचे चलता है।

Q2. मार्केट सायकल के कितने चरण होते हैं?

मार्केट सायकल के 4 मुख्य चरण होते हैं: Accumulation, Advancing, Distribution और Declining।

Q3. मार्केट सायकल क्यों महत्वपूर्ण है?

यह निवेशकों को सही समय पर खरीदने और बेचने में मदद करता है तथा ट्रेंड पहचानने में सहायक होता है।

Q4. मार्केट सायकल की पहचान कैसे करें?

प्राइस एक्शन, वॉल्यूम, ट्रेंडलाइन और सपोर्ट-रेजिस्टेंस के माध्यम से मार्केट सायकल की पहचान की जा सकती है।

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