ट्रेडिंग में एंट्री और एग्जिट जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण है पोजीशन साइजिंग (Position Sizing)। कई ट्रेडर अच्छी स्ट्रेटेजी होने के बावजूद सिर्फ गलत पोजीशन साइज की वजह से अपना अकाउंट ब्लो कर बैठते हैं।
इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि पोजीशन साइजिंग क्या है, यह क्यों जरूरी है और इसे सही तरीके से कैसे कैलकुलेट किया जाता है।
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| पोजीशन साइजिंग (Position Sizing) |
पोजीशन साइजिंग क्या है?
पोजीशन साइजिंग का मतलब है – किसी ट्रेड में आप अपनी कुल पूंजी (Capital) का कितना हिस्सा लगाते हैं।
ट्रेडिंग में रिस्क मैनेज करने के लिए पोजिशन साईजिंग एक महत्वपूर्ण तरीका है। जैसे कि नाम से पता चलता है, यह पोजिशन की साइज निश्चित करने का एक विकल्प है। वास्तव में, ट्रेडिंग करने से पहले, रिस्क मैनेजमेन्ट की शुरुआत पोजिशन साईजिंग से ही होती है।
जैसे कि नाम दर्शाता है, ट्रेडिंग करते समय ट्रेडर जो पोजिशन लेते है, उसकी साइज निश्चित करने का वह एक तरीका है। दुसरे शब्दों में कहें तो, पोजिशन साइज यह ट्रेडर ने किसी भी ट्रेड में लगाई रकम का उल्लेख करती है।
ट्रेडर स्वयं कितना जोखीम उठा सकते है और उनका ट्रेडिंग पोर्टफोलिओ या ट्रेडिंग कैपिटल कितना है उसे ध्यान में लेना चाहिए और उसके आधार पर ट्रेडिंग पोजिशन की साइज का निर्णय लेना चाहिए।
कितनी क्वान्टिटी में सिक्योरिटी खरीदनी या बेचनी है, इसका निर्णय लेने के लिए प्रोफेशनल ट्रेडर्स पोजिशन साईजिंग के कन्सेप्ट का उपयोग करते है। इससे उन्हें जोखीम कम करने में और अधिक कमाई करने में मदद होती है।
यदि आपकी पोजिशन साइज बहुत ही अधिक या बहुत ही कम होगी तो इसका मतलब है कि आप बहुत बड़ा जोखीम उठा रहे है या आप पर्याप्त जोखीम नहीं उठा रहे जो ट्रेडिंग से मुनाफा कमाने के लिए आवश्यक है।
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पोजिशन साइज की गणना
आदर्श पोजिशन साइज की गणना के तरीके को समझने से पहले इस गणना से जुड़े दो महत्वपूर्ण कारकों को समझने का प्रयास करते है
- अकाऊन्ट रिस्क
- ट्रेड रिस्क
1. अकाऊन्ट रिस्क
अकाऊन्ट रिस्क अर्थात ट्रेडिंग कैपिटल का एक निर्धारित प्रतिशत अर्थात आप किसी भी ट्रेड के लिए निश्चित कितना जोखीम उठाने को तैयार है, उसकी लिमिट ।
उदाहरण के तौर पर, यदि आपका ट्रेडिंग कैपिटल रू.१,००,००० है और आपकी जोखीम उठाने की तय लिमिट १ प्रतिशत है, तो इसका अर्थ यह होता है कि किसी निश्चित ट्रेड के लिए आप रू.१००० का जोखीम उठाने को तैयार हो।
आमतौर पर किसी भी ट्रेड के लिए ट्रेडर को अपने ट्रेडिंग कैपिटल के २ से ५ प्रतिशत से अधिक जोखीम नहीं उठाना चाहिए। इतना ही नहीं, सभी ट्रेड के लिए अकाऊन्ट रिस्क लिमिट में बदलाव नहीं करना चाहिए।
2. ट्रेड रिस्क
ट्रेड रिस्क यह ट्रेड एन्ट्री पॉइन्ट और आपने जिस पॉइन्ट पर स्टॉप लॉस ऑर्डर निश्चित किया है उसके बीच का फर्क है।
स्टॉप लॉस को कुछ निश्चित मापदंड के आधार पर तय किया जाता है, जो मैंने अगले चैप्टर में समझाया है।
उदाहरण के तौर पर, यदि आपने किसी कंपनी के शेअर्स रू.१०० के भाव से खरीदे और स्टॉप लॉस रू.९० पर रखा, तो इस मामले में आपका ट्रेड रिस्क रू.१० प्रति शेअर होता है।
अब जब आपने यह निर्धारित कर लिया है कि आपके एन्ट्री पॉइन्ट से आपका स्टॉप लॉस कितना दूर होगा, तो आप उसके आधार पर उस ट्रेड के लिए आदर्श (आयडियल) पोजिशन साइज की गणना कर सकते है।
आयडियल पोजिशन साइज = अकाऊन्ट रिस्क / ट्रेड रिस्क
उदाहरण :
मान लीजिए कि एक ट्रेडर रू.५,००,००० की पूँजी से ट्रेडिंग कर रहा है और एबीसी नाम की कंपनी के शेअर्स रू.८० के भाव से खरीदने है और वह रू.७६ का स्टॉप लॉस और रू.९० का टारगेट रखता है।
इस ट्रेडर के आयडियल ट्रेडिंग साइज की गणना इस प्रकार की जाती है
ट्रेडर ने सभी ट्रेड के लिए २ प्रतिशत की रिस्क लिमिट रखी है ऐसा मानते हुए, इस मामले में अकाऊन्ट रिस्क रु. ५,००,००० के २ प्रतिशत अर्थात रू.१०,००० होता है।
ट्रेड रिस्क = एन्ट्री - स्टॉप लॉस = ८० - ७६ = रू.४
अब आयडियल पोजिशन साइज = १०,०००/ ४ = २५०० शेअर्स
मान लीजिए कि एबीसी कंपनी डेरिवेटिवज में भी ट्रेड करती है और उसमें ५०० शेअर्स का ट्रेडिंग लॉट है।
इस मामले में व्यक्ति कैश मार्केट में २५०० शेअर्स ट्रेड कर सकता है या डेरिवेटिवज में ५ लॉट (२५००/५००) ट्रेड कर सकता है।
बाज़ार की स्थिति चाहे जो भी हो, ट्रेड सेटअप कैसा भी हो या आपकी स्ट्रैटजी जो भी हो, इस पद्धति को अपनाकर आप आयडियल पोजिशन साइज निर्धारित कर सकते हैं।
एक बात हमेशा ध्यान में रखें, बड़ी ट्रेडिंग पोजिशन हमेशा चिंता को बढ़ाती है।
प्रसिद्ध अमेरिकी ट्रेडर और लेखक जॅक स्क्वेजर का एक सूत्र है,
"पोजिशन जितनी बड़ी, उतना जोखीम भी आधक होता है
और ऐसे समय में हम डर के मारे ट्रेडिंग का निर्णय लेते है,
जजमेन्ट या अनुभव के आधार पर नहीं।"
इसलिए किसी भी व्यक्ति को अपनी आर्थिक क्षमता और भावनात्मक स्थिति को ध्यान में लेकर ट्रेडिंग करना चाहिए और इसलिए ऐसे समय में पोजिशन साईजिंग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
निष्कर्ष
ट्रेडिंग में स्ट्रेटेजी से ज्यादा महत्वपूर्ण है रिस्क मैनेजमेंट और पोजीशन साइजिंग। अगर आप हर ट्रेड में केवल 1%–2% रिस्क लेते हैं, तो आपका अकाउंट लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा और आप मार्केट में टिके रहेंगे।
याद रखें: मार्केट में टिकना ही असली जीत है।
FAQ
1. पोजीशन साइजिंग क्या होती है?
पोजीशन साइजिंग का मतलब है किसी एक ट्रेड में अपनी कुल पूंजी का कितना हिस्सा लगाना है, यह तय करना।
2. ट्रेडिंग में कितना प्रतिशत रिस्क लेना चाहिए?
ज्यादातर प्रोफेशनल ट्रेडर्स 1% से 2% तक का रिस्क प्रति ट्रेड लेते हैं।
3. पोजीशन साइजिंग का फॉर्मूला क्या है?
Position Size = Account Risk Amount ÷ Stop Loss (Points या Price Difference)
4. क्या छोटे अकाउंट में पोजीशन साइजिंग जरूरी है?
हाँ, छोटे अकाउंट में तो और भी ज्यादा जरूरी है क्योंकि एक बड़ा नुकसान अकाउंट को जल्दी खत्म कर सकता है।
5. क्या पोजीशन साइजिंग से लगातार नुकसान से बचा जा सकता है?
हाँ, सही पोजीशन साइजिंग बड़े नुकसान से बचाती है और अकाउंट को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है।
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