शेयर बाजार में वॉल्यूम एनालिसिस (Volume Analysis) को कैसे समझें? | How to understand Volume Analysis in the stock market in Hindi?

वॉल्यूम एनालिसिस (Volume Analysis)

शेयर बाजार में सिर्फ कीमत (Price) देखना काफी नहीं होता। असली खेल तब समझ आता है जब आप कीमत के साथ वॉल्यूम (Volume) को भी पढ़ना सीख जाते हैं। वॉल्यूम बताता है कि किसी स्टॉक में कितनी मात्रा में खरीद-बिक्री हो रही है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि वॉल्यूम एनालिसिस क्या है, इसे कैसे समझें, और ट्रेडिंग में कैसे इस्तेमाल करें।

वॉल्यूम एक निश्चित कालावधी के दौरान किसी सिक्योरिटी में हुए ट्रेनज़ेक्शन की संख्या को संदर्भित करता है।


वॉल्यूम एक महत्वपूर्ण मापदंड है जिसका उपयोग अधिकांश टेक्निकल एनालिस्ट सिक्योरिटीज़ के एनालिसिस में करते है। प्राइस मूवमेन्ट के साथ वॉल्यूम का एनालिसिस करके, ट्रेडर या निवेशक किसी भी सिक्योरिटी के भाव में उल्लेखनीय बदलाव के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है।


अधिकांश इन्ट्राडे ट्रेडर्स और स्विंग ट्रेडर्स किसी भी सिक्योरिटी में मौजूदा ट्रेन्ड कितना मजबूत है यह जाँचने के लिए वॉल्यूम का उपयोग करते है।

नए ट्रेडर्स और जिन्होंने ट्रेडिंग में पैसा गंवाया है, ऐसे लोगों में मैंने एक खास बात देखी है कि वह वॉल्यूम का एनालिसिस नहीं करते। वॉल्यूम का एनालिसिस करके उससे अनुमान निकालने से ट्रेडर्स को अन्य ट्रेडर्स की तुलना में अधिक फायदा होता है।


प्राइस और वॉल्यूम के बीच के संबंध को दर्शाने वाली एक प्रसिद्ध कहावत इस प्रकार है,


"प्राइज इज द किंग, बट वॉल्यूम इज द क्वीन"


हाँ, आपने इसे सही पढ़ा है। इसलिए यदि आप ट्रेडिंग कर रहे है और टेक्निकल एनालिसिस का उपयोग करते हो तो एन्ट्री पॉइन्ट तय करते समय केवल प्राइस एक्शन को न देखें। भाव के साथ वॉल्यूम को भी ध्यान में लीजिए और बाद में ही भविष्य में भाव की मूवमेन्ट कैसी होगी इसका अनुमान लगाएं।


अक्सर, ट्रेडिंग वॉल्यूम अधिक हो तो उससे सिक्योरिटी या मार्केट के भविष्य की चाल के बारे में अनुमान लगाना आसान होता है।


नीचे दिए टेबल में दिखाया है कि सिक्योरिटी के भाव में उतार-चढ़ाव की साथ वॉल्यूम में उतार या चढ़ाव होने से क्या होता है।


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वॉल्यूम एनालिसिस


भाव में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही हो और वॉल्यूम भी अधिवः हो तो वह दर्शाता है कि तेजी का ट्रेन्ड या बुलिश रिवर्सल बहुत ही मजबूत है। लेकिन यदि भाव बढ़ रहा हो और वॉल्यूम कम हो तो समझना चाहिए कि यह विश्वसनीय मूवमेन्ट नहीं है।


वैसे ही, भाव में उल्लेखनीय गिरावट हो रही हो और वॉल्यूम अधिक हो तो वह दर्शाता है कि मंदी का ट्रेन्ड या बेअरीश रिवर्सल बहुत ही मजबूत है। लेकिन यदि भाव घट रहा हो और वॉल्यूम कम हो तो समझना चाहिए कि यह विश्वसनीय मूवमेन्ट नहीं है।

ट्रेडिंग में वॉल्यूम एनालिसिस का उपयोग


इसके अलावा ट्रेडिंग वॉल्यूम का उपयोग दुसरे कई मापदंड समझने में भी किया जा सकता है। जैसे कि

  1. लिक्विडिटी।
  2. सपोर्ट और रेजिस्टन्स कायम है या नहीं वह कन्फर्म करने के लिए।
  3. सपोर्ट और रेजिस्टन्स ब्रेकआऊट कन्फर्म करने के लिए।
  4. रिवर्सल चार्ट पैटर्न ब्रेकआऊट कन्फर्म करने के लिए।
  5. कन्टिन्यूएशन चार्ट पैटर्न ब्रेकआऊट कन्फर्म करने के लिए।


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ट्रेडिंग वॉल्यूम

1. लिक्विडिटी 


किसी भी सिक्योरिटी में लिक्विडिटी अर्थात तरलता कितनी है, उसके लिए वॉल्यूम महत्वपूर्ण इन्डिकेटर है। जिन सिक्योरिटी में कम वॉल्यूम होता है, वह दर्शाता है कि उनमें खरीदी या बिक्री करने में किसी को खास रूचि नहीं है।


ऐसी सिक्योरिटीज़ के मामले में टेक्निकल एनालिसिस काम नहीं करता। एक और तथ्य यह है कि इस तरह के इललिक्विड सिक्योरिटीज़ में प्राइस एक्शन मेनिप्यूलेशन आसानी से होता है। यदि आप बहुत कम वॉल्यूम वाली सिक्योरिटीज़ खरीदते है, तो आप उसमें फस सकते है, क्योंकि उसमें लिक्विडिटी न होने के कारण, जब आप उन्हें बेचना चाहते है तब आप उन्हें बेच नहीं सकते।


इसलिए किसी भी सिक्योरिटीज़ में ट्रेडिंग करने से पहले उसके वॉल्यूम की जाँच करना बहुत जरूरी है।

2. सपोर्ट और रेजिस्टन्स कायम है या नहीं यह कन्फर्म करना 


कोई भी सिक्योरिटी निश्चित लेवल पर सपोर्ट लेगा या रेजिस्टन्स का सामना करेगा, यह तय करने के लिए वॉल्यूम एक महत्वपूर्ण इन्डिकेटर है।


जब सिक्योरिटी का भाव सपोर्ट या रेजिस्टन्स के पास आ रहा होता है तब उसका एवरेज वॉल्यूम कम होता है लेकिन जब सिक्योरिटी का भाव सपोर्ट या रेजिस्टन्स के बहुत ही नजदीक आ जाता है तब उसमें वॉल्यूम बढ़ता है।


नीचे दिए उदाहरण से यह कन्सेप्ट बेहतर तरीके से समझने में मदद होगी।


उदाहरण : ट्रेन्डलाइन पर भाव को सपोर्ट मिलना


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ट्रेन्डलाइन पर भाव को सपोर्ट मिलना

ऊपर डॉ. लालपैथ लैब का जुलाई 2017 से जनवरी 2019 के बीच का साप्ताहिक चार्ट दर्शाया है। जैसे कि सर्कल से दिखाया है कि ट्रेन्डलाइन पर भाव को तीन बार सपोर्ट मिला और हर बार वॉल्यूम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी।


यहाँ पर वॉल्यूम में वृद्धि के साथ होने वाली भाव वृद्धि पर खास नज़र रखनी चाहिए।


अब वॉल्यूम से कन्फर्मेशन मिलने के बाद, ट्रेडर्स उन प्राइस पॉइन्ट्स पर खरीदी की पोजिशन ले सकते थे।

3. सपोर्ट और रेजिस्टन्स के ब्रेकआऊट को कन्फर्म करने के लिए 


किसी सिक्योरिटी ने अपने सपोर्ट या रेजिस्टन्स ट्रेन्डलाइन से वास्तविक ब्रेकआऊट दिया है या झूटा ब्रेकआऊट दिया है यह निश्चित करने के लिए वॉल्यूम एक महत्वपूर्ण इन्डिकेटर है।


यदि वॉल्यूम अधिक हो तो समझना चाहिए कि वह वास्तविक ब्रेकआऊट है और यदि वॉल्यूम कम हो तो समझना चाहिए कि वह झूटा ब्रेकआऊट है।


इसलिए ब्रेकआऊट के मामले में वॉल्यूम को जाँचना बहुत जरूरी होता है।


आगे दिए उदाहरण से यह कन्सेप्ट बेहतर तरीके से समझने में मदद होगी।

4. रिवर्सल चार्ट पैटर्न ब्रेकआऊट को कन्फर्म करना 


रिवर्सल चार्ट पैटर्न के मामले में ब्रेकआऊट के वक्त वॉल्यूम का एनालिसिस करना जरूरी होता है। मैंने चार्ट पैटर्न के चैप्टर में लोकप्रिय रिवर्सल चार्ट पैटर्न को समझाते समय इस बात को समझाया है।


जब भी सिक्योरिटी के भाव में चार्ट पैटर्न तैयार होने के बाद ब्रेकआऊट होता है तब वह ब्रेकआऊट कितना मजबूत है यह निश्चित करने के लिए वॉल्यूम को जाँचना जरूरी होता है।


बुलिश रिवर्सल पैटर्न के मामले में यदि बड़े वॉल्यूम के साथ प्राइस ब्रेकआऊट नज़र आया तो माना जा सकता है कि अपट्रेन्ड बहुत ही मजबूत होगा।


इसी तरह, बेअरीश रिवर्सल पैटर्न के मामले में यदि बड़े वॉल्यूम के साथ प्राइस ब्रेकआऊट नज़र आया तो समझना चाहिए कि डाउनट्रेन्ड बहुत ही मजबूत होगा।

5. कन्टिन्यूएशन चार्ट पैटर्न ब्रेकआऊट को कन्फर्म करना 


कन्टिन्यूएशन चार्ट पैटर्न के मामले में ब्रेकआऊट के वक्त वॉल्यूम का एनालिसिस करना जरूरी होता है। मैंने चार्ट पैटर्न के चैप्टर में लोकप्रिय कन्टिन्यूएशन चार्ट पैटर्न को समझाते समय इस बात को समझाया है।


जब भी सिक्योरिटी के भाव में चार्ट पैटर्न तैयार होने के बाद ब्रेकआऊट होता है तब वह ब्रेकआऊट कितना मजबूत है यह निश्चित करने के लिए वॉल्यूम को जाँचना जरूरी होता है।


बुलिश कन्टिन्यूएशन पैटर्न के मामले में यदि बड़े वॉल्यूम के साथ प्राइस ब्रेकआऊट हुआ तो समझना चाहिए कि अपट्रेन्ड और आगे जाएगा। इसी तरह, बेअरीश कन्टिन्यूएशन पैटर्न के मामले में यदि बड़े वॉल्यूम के साथ प्राइस ब्रेकआऊट हुआ तो समझना चाहिए कि डाउनट्रेन्ड और आगे जाएगा।

बॉटम लाइन


किसी भी ट्रेडर या निवेशक को हमेशा ध्यान में रखना चाहिए कि ट्रेडिंग पोजिशन लेते समय सिर्फ वॉल्यूम को ही दिमाग में नहीं रखना चाहिए। प्राइस पैटर्न्स और अन्य प्राइस एक्शन पैरामीटर्स के साथ, वॉल्यूम का उपयोग एक एडिशनल कन्फर्मेशन के लिए करना चाहिए, जिससे अपनी दिशा में आप सही ट्रेडिंग का निर्णय ले सकोगे।


सिर्फ वॉल्यूम के आधार पर ही ट्रेडिंग पोजिशन नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि कई बार सही मायने में अच्छे वॉल्यूम के साथ ब्रेकाआऊट नज़र आने पर भी भाव आपकी दिशा में बढ़ेगा या घटेगा नहीं ऐसा हो सकता है। सभी परिबल सही  होकर भी आपकी दिशा में भाव की मूवमेन्ट नहीं हुई और उस ट्रेड में यदि आपका स्टॉप लॉस हिट हुआ तो उस समय लॉस बुक करके ट्रेड में से एक्झिट हो जाना चाहिए।


लॉस अर्थात नुकसान बुक करना भी हर किसी की ट्रेडिंग जर्नी का ही एक हिस्सा है। इसलिए, जब आपके एनालिसिस के अनुसार मूवमेन्ट नहीं होती, तब लॉस बुक करने में संकोच नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष 

शेयर बाजार में सफल होने के लिए वॉल्यूम एनालिसिस समझना बहुत जरूरी है। वॉल्यूम हमें यह बताता है कि किसी मूव के पीछे कितनी ताकत है। अगर आप प्राइस के साथ वॉल्यूम को पढ़ना सीख गए, तो आपकी ट्रेडिंग में स्पष्टता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे।

FAQ

Q1. क्या वॉल्यूम हर मार्केट में काम करता है?

हाँ, स्टॉक, कमोडिटी, फॉरेक्स (कुछ प्लेटफॉर्म पर), और क्रिप्टो में भी वॉल्यूम उपयोगी है।

Q2. क्या लो वॉल्यूम में ट्रेड करना चाहिए?

लो वॉल्यूम में फेक मूव्स ज्यादा होते हैं, इसलिए सावधानी रखें।

Q3. वॉल्यूम एनालिसिस सीखने में कितना समय लगता है?

नियमित अभ्यास से 2–3 महीनों में बेसिक समझ विकसित हो सकती है।

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