ट्रेडिंग में रिस्क मैनेजमेंट क्या होता है? | What is risk management in trading in Hindi?

अगर आप शेयर मार्केट, फॉरेक्स या क्रिप्टो में ट्रेडिंग करते हैं, तो रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) आपके लिए सबसे ज़रूरी स्किल है। कई ट्रेडर अच्छी स्ट्रेटेजी जानते हैं, लेकिन सिर्फ खराब रिस्क मैनेजमेंट की वजह से अपना अकाउंट ब्लो कर बैठते हैं।

इस लेख में हम समझेंगे कि ट्रेडिंग में रिस्क मैनेजमेंट क्या होता है, क्यों जरूरी है, और इसे सही तरीके से कैसे लागू करें।

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रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management)

मार्क डग्लस ने अपनी किताब 'द डिसिप्लिन्ड टेडर' में कहा है कि सफल टेडिंग 50 प्रतिशत मनी मैनेजमेन्ट और 20 प्रतिशत स्ट्रैटजी है। यही पर रिस्क मैनेजमेन्ट का कन्सेप्ट उपयोगी साबित होता है।


एक सफल ट्रेडर बनने के लिए, रिस्क मैनेजमेन्ट यह ट्रेडिंग का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन दुर्भाग्य से अधिकांश ट्रेडर्स रिस्क मैनेजमेन्ट की अवगणना करते है।


आप मानो या न मानो, मैंने कई ट्रेडर्स और निवेशकों को देखा है जो रिस्क मैनेजमेन्ट को अधिक महत्व नहीं देते और इसलिए वह शेअर बाज़ार में बड़ी रकम गवाते है।


आगे पढ़ने से पहले मैं प्रसिद्ध हेज फंड मैनेजर लेरी हाईट का एक प्रसिद्ध सूत्र बताना चाहता हूँ।


"ट्रेडिंग और जीवन में विजय प्राप्त करने के लिए मेरे पास दो मूल नियम है :


यदि आपने शर्त नहीं लगाई, तो आप जीत नहीं सकते।

यदि आपने सभी चिप्स गवाँ दिए तो आप भविष्य में शर्त नहीं लगा सकते।"


दुसरा महत्वपूर्ण मुद्दा, जो व्यक्ति को हमेशा याद रखना चाहिए वह यह है कि आपका नुकसान जितना बड़ा होगा, भविष्य में उसकी भरपाई करना उतना ही कठिण होगा।


10 प्रतिशत नुकसान को रिकवर करने के लिए आपको भविष्य में 11 प्रतिशत मुनाफा कमाना होगा। वैसे ही 50 प्रतिशत नुकसान रिकवर करने के लिए आपको भविष्य में 100 प्रतिशत मुनाफा कमाना होगा। इसलिए ट्रेडिंग में रिस्क मैनेजमेन्ट बहुत ही महत्वपूर्ण है।

रिस्क मैनेजमेंट क्या होता है?


रिस्क मैनेजमेंट का मतलब है – ट्रेड लेते समय अपने पूंजी (Capital) को सुरक्षित रखने के लिए पहले से नियम तय करना। यानी, अगर ट्रेड गलत हो जाए तो आपको कितना नुकसान स्वीकार है – यह पहले ही तय करना।


रिस्क मैनेजमेन्ट ट्रेडर्स का नुकसान घटाने में मददगार साबित होता है और उन्हें सभी रूपए गवाँने से बचाता है। यदि सही रिस्क मैनेजमेन्ट स्ट्रैटजी न हो तो एक ट्रेडर जिसने बहुत मुनाफा कमाया है वह भी सिर्फ एक या दो खराब ट्रेड में वह सब कुछ खो सकता है।


हालाँकि ट्रेडिंग में दीर्घकालिक सफलता के लिए रिस्क मैनेजमेन्ट आवश्यक है, लेकिन बहुत से लोग इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते।


इसलिए मैं आप से बिनती करता हूँ कि ट्रेडिंग के दौरान रिस्क मैनेजमेन्ट के महत्वपूर्ण पहलू की कभी भी अवगणना न करें।

रिस्क मैनेजमेन्ट स्ट्रैटजीज़


रिस्क मैनेजमेन्ट टुल्स और स्ट्रैटजी को समझना कुछ खास मुश्किल नहीं है, ट्रेडिंग में आए नए लोग भी उसे आसानी से समझ सकते है। एकमात्र समस्या यह है कि ईगो (अंहकार), ग्रीड (लालच) और फियर (डर) इन जैसी मानवी भावनाओं के कारण ट्रेडिंग करते समय लोगों के लिए उन पर अमल करना मुश्किल होता है।


जो लोग ट्रेडिंग में नए है, उनके लिए रिस्क मैनेजमेन्ट स्ट्रैटजीज़ पर अमल करने की आदत डालने के लिए बहुत अभ्यास करना पड़ता है।

  1. ट्रेन्ड को फॉलो करें।
  2. ट्रेड प्लान करें।
  3. सही रिस्क : रिवॉर्ड रेशिओ के साथ ट्रेड करें।
  4. भावनाओं पर नियंत्रण रखें।
  5. पोजिशन साईजिंग।
  6. स्टॉप लॉस के नियम का पालन करें।
  7. मुनाफा बुक करें।

1. ट्रेन्ड फॉलो करें


ट्रेडिंग में रिस्क मैनेज करने के लिए सबसे बुनियादी, आसान और सबसे महत्वपूर्ण तरीका यह है कि हमेशा ट्रेन्ड की दिशा में ट्रेड करें।


जो ट्रेन्ड चल रहा है उस दिशा में ही आपने ट्रेड किया तो आपके गलत साबित होने की संभावना बहुत ही कम होती है और इसलिए पैसे गवाँने का जोखीम अपने आप कम हो जाता है।


यदि कोई सिक्योरिटी या इन्डेक्स स्पष्ट अपट्रेन्ड में हो तो लाँग पोजिशन लेने का प्रयास करें, अर्थात सपोर्ट लेवल पर खरीदी करें और बाद में रेजिस्टन्स लेवल पर बिक्री करें।


वैसे ही, यदि कोई सिक्योरिटी या इन्डेक्स में स्पष्ट डाउनट्रेन्ड हो तो शॉर्ट पोजिशन लेने का प्रयास करें, अर्थात रेजिस्टन्स पर बिक्री करें और बाद में सपोर्ट पर फिर से खरीदी करें।


कोन्ट्रेरियन ट्रेड लेने का कभी भी प्रयास न करें, अर्थात ट्रेन्ड के विपरीत दिशा में जाकर कभी भी ट्रेड न करें।


ट्रेडिंग के बारे में एक पूरानी कहावत हमेशा ध्यान में रखें, 'ट्रेन्ड ईज योर फ्रेन्ड' अर्थात ट्रेन्ड ही आपका मित्र है।

2. ट्रेड प्लान करें


बिजनेस में एक पूरानी और प्रसिद्ध कहावत है 'ईफ यू फेल टु प्लान, यु प्लान टु फेल' अर्थात यदि आप योजना बनाने में असफल हुए तो आप असफल होने की योजना बना रहें है। यही सिद्धांत ट्रेडिंग में भी लागू होता है।


सफल ट्रेडर्स बहुत ही अनुशासित होते है और हमेशा अपने ट्रेडिंग प्लान के अनुसार ट्रेडिंग करते है।


ट्रेडिंग में सफल होने के लिए प्लान करना और उस पर अमल करना बहुत ही जरूरी होता है। ट्रेडिंग के संदर्भ में ट्रेड प्लान करने का तात्पर्य है कि ट्रेड में कब एन्टर होना है, कब तक पोजिशन को होल्ड करना है और कब ट्रेड में से एक्झिट होना है। ट्रेडिंग प्लान के अभाव में, व्यक्ति गैर-जिम्मेदार तरीके से ट्रेडिंग करता है और एन्ट्री या एक्झिट के लिए कोई निश्चित स्ट्रैटजी को नहीं अपनाता तो परिणाम स्वरूप पैसे गवाँने की आफत आ सकती है।


इसलिए ट्रेडिंग जर्नल मेन्टेन करने की आदत बहुत जरूरी है। इस किताब में आगे मैंने उस बारे में विस्तार से चर्चा की है।

3. सही रिस्क रिवॉर्ड रेशिओ के साथ ट्रेड करें 


अन्य महत्वपूर्ण रिस्क मैनेजमेन्ट के तरिकों में पूर्वनिर्धारीत रिस्क रिवॉर्ड रेशिओ के आधार पर ट्रेडिंग का समावेश होता है।


रिस्क-रिवॉर्ड रेशिओ निवेशकों के ट्रेड में पैसे गवाँने के जोखीम को मैनेज करने में मददगार साबित होता है।


रिस्क-रिवॉर्ड रेशिओ ट्रेड से संभावित लाभ की तुलना ट्रेड से संभावित नुकसान से करता है। ट्रेड के एन्ट्री पॉइन्ट और स्टॉप लॉस ऑर्डर के बीच के फर्क (रिस्क) को टारगेट प्राइस और एन्ट्री पॉइन्ट के बीच के फर्क (रिवॉर्ड) से विभाजित करके यह रेशिओ प्राप्त किया जाता है।


यदि आपका रिस्क रिवार्ड रेशिओ 1:2 हो और आपने 10 रू. का स्टॉप लॉस रखा हो तो आपको उस ट्रेड में 20 रू. का मुनाफा होने की संभावना होती है।


एक व्यापक धारणा है कि ट्रेडिंग में लगातार मुनाफा कमाने के लिए रिस्क- रिवॉर्ड रेशिओ 1:2 या उससे अधिक होना जरूरी है।


आदर्श रिस्क रिवॉर्ड रेशिओ के बारे में कोई निश्चित नियम नहीं है। व्यक्ति की जोखीम उठाने की क्षमता और ट्रेडिंग स्टाईल पर वह निर्भर करता है। आपके लिए कौन सा रेशिओ अनुकूल है, यह ट्रायल एन्ड-एरर से निश्चित हो सकता है। लेकिन किसी भी परिस्थिति में वह 1:2 या उससे अधिक होना चाहिए।


किसी भी ट्रेड में एन्टर होने से पहले, ट्रेडर को उस ट्रेड के लिए संभावित रिस्क-रिवॉर्ड रेशिओ की गणना करनी चाहिए और यदि वह रेशिओ ट्रेडर के स्वीकार्य रिस्क रिवॉर्ड रेशिओ से कम हो तो ऐसे ट्रेड में आगे नहीं बढ़ना चाहिए, ऐसे ट्रेड को टालना चाहिए।

4. भावनाओं पर नियंत्रण रखें 


फियर और ग्रीड अर्थात डर और लालच फाइनेन्शियल मार्केट में बहुत ज्यादा हावी होते है। ट्रेडिंग सायकोलॉजी में भी यह दो शब्द महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है।


ट्रेडर किसी ट्रेड में एन्टर या एक्झिट होने से कतराता है, तब उसमें फियर अर्थात डर नज़र आता है। दुसरी ओर ट्रेडर तुरंत पैसे कमाने के लालच में अपनी क्षमता से अधिक रूपयों का ट्रेड करता है तब उसमें ग्रीड अर्थात लालच नज़र आता है।


आपके पास सही प्लान और ट्रेडिंग सिस्टम है, लेकिन यदि आपने फियर या ग्रीड के कारण उस प्लान का ईमानदारी से पालन नहीं किया तो आप कभी भी निरंतर कमाई नहीं कर सकते।


इसलिए यदि आप लंबी अवधि के लिए ट्रेडिंग में सफल होना चाहते है तो आपको अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा और फियर और ग्रीड आपके ट्रेडिंग के निर्णय को प्रभावित नहीं करेंगे, इसकी पुष्टी करनी होगी।


ट्रेडिंग में नए से एन्टर हुए पाठक मित्रों को ट्रेडिंग सायकोलॉजी से संबंधित किताबें पढ़ने और उनमें से सिखने की मैं सलाह देता हूँ। यह बहुत ही गहन विषय है, जिसे पढ़ने से आपको ट्रेडिंग में निर्णय लेने के लिए मदद होगी।

5. पोजिशन साईजिंग


ट्रेडिंग में रिस्क मैनेज करने के लिए पोजिशन साईजिंग महत्वपूर्ण है। जैसे कि नाम से पता चलता है, वह पोजिशन की साइज तय करने का विकल्प है। दुसरे शब्दों में कहे तो पोजिशन साईजिंग यह ट्रेडर निश्चित ट्रेड में कितने पैसे लगाता है, यह दर्शाता है।


ट्रेडर स्वयं कितना जोखीम उठा सकता है और उसका ट्रेडिंग पोर्टफोलिओ या ट्रेडिंग कैपिटल कितना है, उसे ध्यान में लेना चाहिए और उसके आधार पर ट्रेडिंग पोजिशन की साइज का निर्णय लेना चाहिए।


मैंने इस पोस्ट में आगे कुछ प्रॅक्टिकल उदाहरणों द्वारा इस कन्सेप्ट को समझाने का प्रयास किया है क्योंकि वह ट्रेडिंग के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज है।

6. स्टॉप लॉस के नियम का पालन करें 


रिस्क मैनेजमेन्ट का सबसे आसान और परिणाम कारक विकल्प है स्टॉप लॉस के नियम का पालन करना।


स्टॉप लॉस का उपयोग करने के पिछे का विचार यह है कि मार्केट आपकी सोच के खिलाफ गया तो ऐसे वक्त आप अपनी पोजिशन क्लोज करके नुकसान को सीमित कर सकते है, जिससे आप बड़े नुकसान से बच जाते है और आपकी पूँजी धूलजाने से बच जाती है।

7. मुनाफा बुक करें 


सिक्योरिटीज़ में ट्रेडिंग के दरम्यान अपनी पोजिशन में से नियमित रूप से मुनाफा बुक करते रहना बहुत ही महत्वपूर्ण है। आपको किसी भी ट्रेडिंग पोजिशन में एन्टर होने से पहले ही कब पोजिशन एक्झिट करनी है या प्रॉफिट बुक करना है, यह स्पष्ट करना चाहिए।


अक्सर यह कहा जाता है कि ट्रेडिंग में सफल होने के लिए व्यक्ति को नुकसान को मर्यादित करने और मुनाफे को बढ़ाने को सिखना चाहिए। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि आप जब मुनाफा बुक करते है (अर्थात पोजिशन एक्झिट करते है) तभी मुनाफा बुक हुआ ऐसा कहा जाता है। इसके बिना सिर्फ कागज पर मुनाफा दिखता है। पोजिशन खड़ी हो और मुनाफा दिखता हो, फिर भी उसके कभी भी धूल जाने की संभावना होती है। कई बार ऐसा भी होता है कि यह मुनाफा देखते ही देखते नुकसान में बदल जाता है।


प्रोफेशनल ट्रेडर्स आमतौर पर मुनाफा बुक करने के लिए ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का उपयोग करते है। मैंने इस बात को पोस्ट में आगे विस्तार से समझाया है।

निष्कर्ष

ट्रेडिंग में असली गेम प्रॉफिट कमाने का नहीं, बल्कि कैपिटल बचाने का है। अगर आप रिस्क मैनेजमेंट सीख गए, तो आप लंबे समय तक मार्केट में टिक सकते हैं।

याद रखें:“पहले नुकसान को कंट्रोल करें, फिर मुनाफा अपने आप आएगा।”

FAQ

ट्रेडिंग में रिस्क मैनेजमेंट क्या होता है?

ट्रेडिंग में रिस्क मैनेजमेंट का मतलब है अपने कैपिटल को सुरक्षित रखने के लिए पहले से नियम बनाना, जैसे कि एक ट्रेड में कितना नुकसान स्वीकार करना है और स्टॉप लॉस कहाँ लगाना है।

एक ट्रेड में कितना प्रतिशत रिस्क लेना चाहिए?

ज्यादातर प्रोफेशनल ट्रेडर 1% से 2% तक का रिस्क लेते हैं। मतलब अगर आपका अकाउंट ₹1,00,000 है, तो एक ट्रेड में ₹1,000–₹2,000 से ज्यादा का रिस्क नहीं लेना चाहिए।

रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो क्या होता है?

रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो यह बताता है कि आप जितना रिस्क ले रहे हैं, उसके मुकाबले कितना प्रॉफिट कमाने की उम्मीद है। आदर्श रेशियो 1:2 या उससे अधिक होना चाहिए।

क्या बिना स्टॉप लॉस के ट्रेडिंग करना सही है?

नहीं। बिना स्टॉप लॉस के ट्रेडिंग करना बहुत खतरनाक हो सकता है। मार्केट कभी भी अचानक मूव कर सकता है और बड़ा नुकसान दे सकता है।

क्या अच्छी स्ट्रेटेजी होने के बाद भी रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है?

हाँ, बिल्कुल। भले ही आपकी स्ट्रेटेजी 60%–70% सही हो, अगर रिस्क मैनेजमेंट सही नहीं है तो अकाउंट जल्दी खत्म हो सकता है।

क्या रिस्क मैनेजमेंट से लॉस पूरी तरह खत्म हो जाता है?

नहीं। रिस्क मैनेजमेंट लॉस को खत्म नहीं करता, बल्कि उसे कंट्रोल करता है ताकि आपका अकाउंट सुरक्षित रहे और आप लंबे समय तक ट्रेडिंग कर सकें।

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