टेक्निकल एनालिसिस के सभी पहलुओं में शायद सबसे महत्वपूर्ण कन्सेप्ट सपोर्ट और रेजिस्टन्स है। टेक्निकल एनालिसिस के अन्य कई पहलू इस कन्सेप्ट पर आधारित है। इसलिए आगे बढ़ने से पहले, हमें पहले इस कन्सेप्ट को अच्छी तरह से समझने की जरूरत है।
सपोर्ट और रेजिस्टन्स किसी भी सिक्योरिटी के चार्ट पर महत्वपूर्ण प्राइस पॉइन्ट्स होते है, जिन पर उस सिक्योरिटी में महत्तम खरीदी और बिक्री की उम्मीद की जाती है।
इस पॉइन्ट पर भाव में बदलाव या रिवर्सल कि सबसे अधिक संभावना होती है अर्थात भाव बढ़ रहा हों तो वह घटने की और घट रहा हों तो बढ़ने की संभावना अधिक होती है। इसके पीछे का कारण डिमान्ड और सप्लाय है।
किसी भी फाइनान्शियल असेट या सिक्योरिटी का भाव डिमान्ड और सप्लाय के नियमों पर आधारित होता है। डिमान्ड (खरीदार) सप्लाय (विक्रेता) से अधिक हो तो सिक्योरिटी का भाव बढ़ता है और सप्लाय (विक्रेता) डिमान्ड (खरीदार) से अधिक हो तो सिक्योरिटी का भाव घटता है।
'बाय लो एन्ड सेल हाई' अर्थात निचले भाव से खरीदें और ऊपरी भाव से बिक्री करों यह पुरानी कहावत किसी भी फाइनान्शियल मार्केट (स्टॉक, कमोडिटी, करन्सी, क्रिप्टोकरन्सी आदि) में कमाई की एक अनिवार्य शर्त है। यहीं पर सपोर्ट और रेजिस्टन्स उपयोग में आते है। इसके लिए व्यक्ति को सपोर्ट लेवल पर खरीदना चाहिए और फिर रेजिस्टन्स लेवल पर बेचना चाहिए अथवा रेजिस्टन्स लेवल पर पहले बेचना चाहिए और फिर सपोर्ट लेवल पर वापस खरीदना चाहिए।
ज्यादातर ट्रेडर्स ट्रेडिंग के दरम्यान सपोर्ट और रेजिस्टन्स के कन्सेप्ट को महत्वपूर्ण परिबल के जैसे उपयोग में लाते है, चाहे वह स्कॅल्पिंग हो, डे ट्रेडिंग हो, स्विंग ट्रेडिंग हो या पोजिशनल ट्रेडिंग हो।
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| सपोर्ट और रेजिस्टन्स |
सपोर्ट क्या है?
सपोर्ट एक ऐसा लेवल है जहाँ से किसी भी सिक्योरिटी का भाव नीचे नहीं जाता क्योंकि उस स्तर पर डिमान्ड अधिक होती है जो भाव को अधिक नीचे जाने से रोकती है।
जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, सप्लाय जब डिमान्ड से अधिक होती है तब सिक्योरिटी का भाव घटता है। भाव जब सपोर्ट लेवल के करीब आता है तब ज्यादा से ज्यादा खरीदार (बायर्स) उस सिक्योरिटी को खरीदने के लिए तैयार होते है, जिससे सप्लाय की तुलना में डिमान्ड बढ़ती है और परिणामस्वरूप भाव अधिक नीचे जाने से अटकता है और वहाँ से भाव बढ़ने लगता है।
सपोर्ट हमेशा किसी भी सिक्योरिटी के वर्तमान बाज़ार भाव से नीचे नज़र आता है।
सपोर्ट लेवल सिंगल प्राइस लेवल के रूप में या झोन के रूप में नज़र आता है। आप इस चैप्टर में आगे दिए उदाहरणों को देखोगे तब आपको यह बात अधिक स्पष्ट होगी।
Example: अगर कोई शेयर बार-बार ₹100 से ऊपर चला जाता है, तो ₹100 उसका Strong Support माना जाएगा।
सपोर्ट लेवल या झोन आपको एक रेफरन्स पॉइन्ट देता है जहाँ पर भूतकाल में सबसे अधिक खरीदी (डिमान्ड) दिखाई देती है और भविष्य में भी ऐसा होने की संभावना दर्शाता है। यह महत्वपूर्ण टेक्निकल लेवल होता है।
सपोर्ट लेवल या झोन को कैसे निर्धारित करें?
सपोर्ट लेवल या झोन निर्धारित करने के लिए निम्नलिखित चरणों का उपयोग किया जाना चाहिए।
- भूतकाल के भाव के डेटा की जाँच करें।
- सबसे नीचले लेवल्स को निर्धारित करें।
- सभी नीचले लेवल्स को अंकित करें।
- सभी टच पॉइन्ट्स को जोड़े।
1. भूतकाल के भाव के डेटा की जाँच करें : आपको जिस सिक्योरिटी के सपोर्ट लेवल को निर्धारित करना है उसके भूतकाल के भाव के डेटा को सबसे पहले प्राप्त करना जरूरी है।
इस प्रक्रिया के लिए आप कैन्डलस्टिक चार्ट या ओएचएलसी (OHLC) बार चार्ट का उपयोग कर सकते है। लाइन चार्ट का कभी भी उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि वह ट्रेडिंग के दिन के ओपन, हाई, लो प्राइस को ध्यान में नहीं लेता।
मैं हमेशा कैन्डलस्टिक चार्ट का उपयोग करना पसंद करता हूँ, क्योंकि वह सभी प्रकार के चार्ट में सबसे सरल है और सभी जरूरी जानकारी उनसे मिलती है।
2. सबसे नीचले लेवल्स को निर्धारित करें : सबसे नीचले लेवल्स को निर्धारित करें अर्थात ऐसे प्राइस पॉइन्ट्स या झोन्स जहाँ से सिक्योरिटी का भाव बढ़ने लगता है।
यहाँ पर प्राइस पॉइन्ट्स ऐसे विशेष पॉइन्ट्स होते है जहाँ से भाव में शार्प रिवर्सल नज़र आता है और प्राइस झोन्स ऐसे विशेष झोन्स होते है जिनमें भाव घटने के बाद अटक जाता है।
3. सभी नीचले लेवल्स को अंकित करें : सपोर्ट लेवल के लिए आपको सभी नीचले लेवल्स को निर्धारित करना होगा या सभी लेवल्स को अंकित करना होगा या सर्कल करना होगा जिससे वह अधिक स्पष्टरूप से नज़र में आ सकते है और अच्छी तरह से समझ आते है। कम से कम ऐसे तीन या उससे अधिक पॉइन्ट्स को निर्धारित करें।
4. सभी टच पॉइन्ट्स को जोड़े : सभी टच पॉइन्ट्स को अंकित करने के बाद उन सभी टच पॉइन्ट्स को जोड़े।
अब प्राइस एक्शन और कालावधी से संबंधित डेटा के आधार पर यह टच पॉइन्ट्स एक या उससे अधिक होरिझोन्टल लाइन द्वारा या एक या उससे अधिक रेक्टेंग्युलर झोन द्वारा इस प्रकार से जोड़े जाते है जिससे आपको चार्ट पर सिंगल सपोर्ट लेवल, मल्टिपल सपोर्ट लेवल्स या सिंगल सपोर्ट झोन या मल्टिपल सपोर्ट झोन्स मिलते है जैसा कि नीचे दिए गए उदाहरणों में दिखाया गया है।
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| सपोर्ट और रेजिस्टन्स |
रेजिस्टन्स क्या है?
रेजिस्टन्स एक ऐसा लेवल है जहाँ से किसी भी सिक्योरिटी का भाव ऊपर जाने से अटकता है क्योंकि उस स्तर पर सप्लाय अधिक होता है जो भाव को अधिक ऊपर जाने से रोकता है।
जैसे कि पहले बताया गया है, डिमान्ड जब सप्लाय से अधिक होती है तब सिक्योरिटी का भाव बढ़ता है। भाव जब रेजिस्टन्स लेवल के करीब आता है तब ज्यादा से ज्यादा बिक्री करने वाले (सेलर्स) उस सिक्योरिटी को बेचने के लिए तैयार होते है, जिससे डिमान्ड की तुलना में सप्लाय बढ़ता है और परिणामस्वरूप भाव अधिक ऊपर जाने से अटकता है और वहाँ से भाव घटने लगता है।
रेजिस्टन्स हमेशा किसी भी सिक्योरिटी के वर्तमान बाज़ार भाव से ऊपर नज़र आता है।
Example: अगर कोई शेयर ₹200 पर बार-बार रुक जाता है, तो ₹200 उसका Resistance लेवल होगा।
रेजिस्टन्स लेवल सिंगल प्राइस लेवल के रूप में या झोन के रूप में नज़र आता है। आप इस चैप्टर में आगे दिए उदाहरणों को देखोंगे तब आपको यह बात अधिक स्पष्ट होगी।
रेजिस्टन्स लेवल या झोन एक रेफरन्स पॉइन्ट होता है जहाँ पर भूतकाल में सबसे अधिक बिक्री (सप्लाय) नज़र आती है और भविष्य में भी ऐसा होने कि संभावना दर्शाता है। यह महत्वपूर्ण टेक्निकल लेवल होता है।
रेजिस्टन्स लेवल या झोन किस प्रकार निर्धारित करें?
रेजिस्टन्स लेवल या झोन निर्धारित करते समय निम्नलिखित चरणों को उपयोग में लिया जाना चाहिए।
- भूतकाल के भाव के डेटा की जाँच करें।
- सबसे ऊपरी लेवल्स को निर्धारित करें।
- सभी ऊपरी लेवल्स को अंकित करें।
- सभी टच पॉइन्ट्स को जोड़े।
जिस प्रकार से सपोर्ट लेवल या सपोर्ट झोन को निर्धारित करने की प्रक्रिया है, वैसी ही प्रक्रिया रेजिस्टन्स लेवल या रेजिस्टन्स झोन को निर्धारित करने के लिए है। फर्क सिर्फ इतना है कि सपोर्ट लेवल या झोन में सभी नीचले लेवल को जोड़ा जाता है, तो रेजिस्टन्स लेवल या झोन में सभी ऊपरी लेवल्स को जोड़ा जाता है। फिर भी मैंने यहाँ फिर से इस प्रक्रिया को समझाया है।
1. भूतकाल के भाव के डेटा की जाँच करें : का रेजिस्टन्स लेवल निर्धारित करना है उसके को सबसे पहले प्राप्त करना जरूरी है। आपको जिस सिक्योरिटी भूतकाल के भाव के डेदा
2. सबसे ऊपरी लेवल को निर्धारित करें : सबसे ऊपरी लेवल्स को निर्धारित करें अर्थात ऐसे प्राइस पॉइन्ट्स या लेवल्स जहाँ से सिक्योरिटी का भाव घटने लगता है।
यहाँ पर प्राइस पॉइन्ट्स ऐसे विशेष पॉइन्ट्स होते है जहाँ से भाव में शार्ष रिवर्सल नज़र आता है और प्राइस झोन्स ऐसे विशेष झोन्स होते है जिनमें भान बढ़ने के बाद अटक जाता है।
3. सभी ऊपरी लेवल को अंकित करें : रेजिस्टन्स लेवल के लिए आपको सभी ऊपरी लेवल्स को निर्धारित करने के बाद उन सभी लेवल्स को अंकित करना है या सर्कल करना है जिससे वह अधिक स्पष्टरूप से नज़र में आ सकते है और अच्छी तरह से समझ आते है।
एक बार फिर यहाँ पर आपको कम से कम तीन या उससे अधिक पॉइन्ट को निर्धारित करना है।
4. सभी टच पॉइन्ट को एक दुसरे से जोड़े : सभी टच पॉइन्ट्स को अंकित करने के बाद उन सभी टच पॉइन्ट्स को जोड़े।
अब प्राइस एक्शन और कालावधी से संबंधित डेटा के आधार पर यह टच पॉइन्ट्स एक या उससे अधिक होरिझोन्टल लाइन द्वारा या एक या उससे अधिक रेक्टेंग्युलर झोन द्वारा इस प्रकार से जोड़े जाते है जिससे आपको चार्ट पर सिंगल रेजिस्टन्स लेवल, मल्टिपल रेजिस्टन्स लेवल्स या सिंगल रेजिस्टन्स झोन या मल्टिपल रेजिस्टन्स झोन्स मिलते है।
निष्कर्ष
अगर आप ट्रेडिंग में लगातार प्रॉफिट करना चाहते हैं, तो सपोर्ट और रेजिस्टेंस की सही समझ बहुत जरूरी है। यह हर स्ट्रेटेजी की नींव है — चाहे वह Price Action हो या Indicator Based Trading।
FAQs
Q1. सपोर्ट और रेजिस्टेंस क्या हर टाइमफ्रेम पर काम करता है?
✔ हाँ, लेकिन Higher Timeframe ज्यादा मजबूत होता है।
Q2. कौन-सा सपोर्ट सबसे मजबूत होता है?
✔ जो लेवल कई बार टेस्ट हुआ हो।
Q3. क्या सपोर्ट और रेजिस्टेंस फिक्स होता है?
✔ नहीं, यह एक ज़ोन होता है, लाइन नहीं।
Q4. क्या सपोर्ट टूट सकता है?
✔ हाँ, Strong Selling में सपोर्ट टूट जाता है।
Q5. क्या बिगिनर्स सपोर्ट-रेजिस्टेंस से ट्रेड कर सकते हैं?
✔ हाँ, यह बिगिनर्स के लिए सबसे बेस्ट तरीका है।
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