ट्रेडिंग की दुनिया में चार्ट पैटर्न बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब मार्केट में न तो साफ़ अपट्रेंड दिखता है और न ही डाउनट्रेंड, बल्कि कीमत एक सीमित रेंज में घूमती रहती है, तो वहाँ अक्सर न्यूट्रल चार्ट पैटर्न (Neutral Chart Pattern) बनता है।
यह पैटर्न बताता है कि बाजार फिलहाल निर्णय की स्थिति में है — यानी खरीदार (Buyers) और विक्रेता (Sellers) दोनों लगभग बराबरी पर हैं।
न्यूट्रल चार्ट पैटर्न क्या होता है?
न्यूट्रल चार्ट पैटर्न वह पैटर्न होता है जिसमें कीमत एक निश्चित दायरे (Range) के अंदर घूमती रहती है और किसी स्पष्ट दिशा (Trend) में ब्रेकआउट नहीं देती।
- राइजिंग चैनल (Rising Channel)
- फॉलिंग चैनल (Falling Channel)
- राइजिंग वेज (Rising Wedge)
- फॉलिंग वेज (Falling Wedge)
- सिमेट्रिकल ट्रायंगल (Symmetrical Triangle)
![]() |
| न्यूट्रल चार्ट पैटर्न |
1. राइजिंग चैनल (Rising Channel)
राइजिंग चैनेल पैटर्न ऊपर की दिशा में चढ़ाई (स्लोप) दर्शाने वाले दो पैरेलल ट्रेन्डलाइन से तैयार होता है जो सपोर्ट और रेजिस्टन्स के जैसे कार्य करते है। अपट्रेन्ड के दौरान यह पैटर्न नज़र आता है और उसमें हायर हाई और हायर लो तैयार होते है।
यदि भाव ऊपर की दिशा में ब्रेकआऊट देता है तो वह कन्टिन्यूएशन पैटर्न के जैसे कार्य करता है और यदि भाव नीचे की दिशा में ब्रेकआऊट देता है तो वह रिवर्सल पैटर्न के जैसे कार्य करता है।
यह पैटर्न दर्शाता है कि जैसे-जैसे भाव बढ़ता है, खरीदरों और विक्रेताओं के बीच रस्साकशी होती है और अंत में उनमें से एक का पलड़ा भारी होता है, जो ब्रेकआऊट की दिशा पर निर्भर करता है।
अगले पन्ने पर मैंने दिखाया है कि यह पैटर्न कन्टिन्यूएशन पैटर्न और रिवर्सल पैटर्न की तरह कैसे कार्य करता है।
इस पैटर्न के मामले में, ट्रेडर्स ब्रेकआऊट कौन सी दिशा में होता है, उसके आधार पर ट्रेड करते है। यदि भाव ऊपर की दिशा में रेजिस्टन्स को तोड़ता हो तो ट्रेडर्स लाँग पोजिशन लेते है (वर्तमान अपट्रेन्ड का कन्टिन्यूएशन) और यदि भाव नीचे की दिशा में सपोर्ट को तोड़ता हो तो ट्रेडर्स शॉर्ट पोजिशन लेते है (वर्तमान अपट्रेन्ड का रिवर्सल)।
सामान्यरूप से इस पैटर्न के लिए संभावित टारगेट, चैनेल की ऊँचाई अर्थात दो पैरेलल ट्रेन्डलाइन के बीच की हाईट के बराबर, ब्रेकआऊट के प्लेसमेन्ट के आधार पर, ब्रेकआऊट पॉइन्ट के ऊपर या नीचे गिना जाता है।
इस पैटर्न में ब्रेकआऊट के प्लेसमेन्ट के आधार पर स्टॉप लॉस लगाया जाता है। यदि भाव ऊपर की दिशा में रेजिस्टन्स को तोड़ता हो तो रेजिस्टन्स के नीचे स्टॉप लॉस लगाया जाता है और यदि भाव नीचे की दिशा में सपोर्ट को तोड़ता हो तो सपोर्ट के ऊपर स्टॉप लॉस लगाया जाता है।
जब भाव सपोर्ट या रेजिस्टन्स को तोड़ता है, तब वॉल्यूम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई तो पैटर्न को अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
2. फॉलिंग चैनल (Falling Channel)
फॉलिंग चैनेल पैटर्न नीचे की दिशा में ढलान (स्लोप) दर्शाने वाले दो पैरेलल ट्रेन्डलाइन से तैयार होता है जो सपोर्ट और रेजिस्टन्स के जैसे कार्य करते है।
डाउनट्रेन्ड के दौरान यह पैटर्न नज़र आता है और उसमें लोअर हाई और लोअर लो तैयार होते है।
यदि भाव नीचे की दिशा में ब्रेकआऊट देता है तो वह कन्टिन्यूएशन पैटर्न के जैसे कार्य करता है और यदि भाव ऊपर की दिशा में ब्रेकआऊट देता है तो वह रिवर्सल पैटर्न के जैसे कार्य करता है।
यह पैटर्न दर्शाता है कि जैसे-जैसे भाव घटता है, खरीदरों और विक्रेताओं के बीच रस्साकशी होती है और अंत में उनमें से एक का पलड़ा भारी होता है, जो ब्रेकआऊट की दिशा पर निर्भर करता है।
नीचे मैंने दिखाया है कि यह पैटर्न कन्टिन्यूएशन पैटर्न और रिवर्सल पैटर्न की तरह कैसे कार्य करता है।
इस पैटर्न के मामले में, ट्रेडर्स ब्रेकआऊट कौन सी दिशा में होता है, उसके आधार पर ट्रेड करते है। यदि भाव ऊपर की दिशा में रेजिस्टन्स को तोड़ता हो तो ट्रेडर्स लाँग ट्रेड लेते है (वर्तमान अपट्रेन्ड का रिवर्सल) और यदि भाव नीचे की दिशा में सपोर्ट को तोड़ता हो तो ट्रेडर्स शॉर्ट ट्रेड लेते है (वर्तमान अपट्रेन्ड का कन्टिन्यूएशन)।
सामान्यरूप से इस पैटर्न के लिए संभावित टारगेट, चैनेल की ऊँचाई अर्थात दो पैरेलल ट्रेन्डलाइन के बीच की हाईट के बराबर, ब्रेकआऊट के प्लेसमेन्ट के आधार पर, ब्रेकआऊट पॉइन्ट के ऊपर या नीचे गिना जाता है।
इस पैटर्न में ब्रेकआऊट के प्लेसमेन्ट के आधार पर स्टॉप लॉस लगाया जाता है। यदि भाव ऊपर की दिशा में रेजिस्टन्स को तोड़ता हो तो रेजिस्टन्स के नीचे स्टॉप लॉस लगाया जाता है और यदि भाव नीचे की दिशा में सपोर्ट को तोड़ता हो तो सपोर्ट के ऊपर स्टॉप लॉस लगाया जाता है।
जब भाव सपोर्ट या रेजिस्टन्स को तोड़ता है, तब वॉल्यूम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई तो पैटर्न अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
- राइजिंग रेजिस्टेंस (Rising Resistance) क्या है?
- शेयर बाजार में मार्केट सायकल क्या होता है?
- कैंडलस्टिक पैटर्न को कैसे समझें?
- कैंडलस्टिक पैटर्न कितने प्रकार के होते हैं?
- कैंडलस्टिक पैटर्न का एडवांस एनालिसिस क्या है?
3. राइजिंग वेज (Rising Wedge)
राइजिंग वेज यह एक बेअरीश पैटर्न है जो शुरूआत में चौड़ा (वाईड) होता है और बाद में सिकुड (कॉन्ट्रॅक्ट) जाता है क्योंकि इस पैटर्न में जैसे-जैसे भाव बढ़ता है वैसे-वैसे ट्रेडिंग रेन्ज संकरी हो जाती है।
यह पैटर्न दो कन्वर्जिंग लाइन्स से तैयार होता है अपर रेजिस्टन्स लाइन और लोअर सपोर्ट लाइन। यह दोनों लाइन्स इस प्रकार तैयार होती है कि वेज का स्लोप ऊपर की दिशा में हो। यह दो कन्वर्जिंग लाइन्स संकेत देती है कि पैटर्न में दिखने वाली तेजी कम हो रही है, अर्थात घट रही है।
यदि यह पैटर्न डाउनट्रेन्ड में बनता है तो यह कन्टिन्यूएशन पैटर्न की तरह कार्य करता है और यदि यह पैटर्न अपट्रेन्ड में तैयार हुआ तो वह रिवर्सल पैटर्न की तरह कार्य करता है। दोनों मामलों में, भाव नीचे की दिशा में लोअर सपोर्ट लाइन को तोड़ते हुए नज़र आता है।
यह पैटर्न दर्शाता है कि वेज के भीतर भाव बढ़ने के कारण, खरीदारों और विक्रेताओं के बीच रस्साकशी शुरू है और अंत में विक्रेता बाजी मार लेते है और भाव वहाँ से नीचे जाने की संभावना होती है।
मैंने नीचे दिखाया है कि यह पैटर्न कन्टिन्यूएश्न पैटर्न और रिवर्सल पैटर्न की तरह कैसे कार्य करता है।
भाव जब नीचे की दिशा में लोअर सपोर्ट लाइन को तोड़ता है, तभी पैटर्न पूर्ण हुआ, ऐसा माना जाता है। उस समय सिक्योरिटी में शॉर्ट एन्ट्री ली जाती है।
भाव जब सपोर्ट लाइन को तोड़ता है, तब वॉल्यूम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई तो पैटर्न को अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
इस पैटर्न के मामले में, टारगेट की गणना करने के लिए कोई तकनीक नहीं है। इसलिए इस पैटर्न के मामले में ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का उपयोग करने अथवा टारगेट निश्चित करने के लिए टेक्निकल एनालिसिस के अन्य टुल्स का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
इस पैटर्न में लोअर सपोर्ट लाइन के थोड़ा ऊपर स्टॉप लॉस लगाया जाता है, जो ऊपर दिए गए चार्ट में दिखाया है।
- राइजिंग सपोर्ट (Rising Support) क्या है?
- ट्रेडिंग में फ़ॉलिंग सपोर्ट (Falling Support) क्या है?
- ट्रेडिंग में फॉलिंग रेजिस्टेंस (Falling Resistance) क्या है?
- डायनामिक सपोर्ट और रेजिस्टेंस क्या होता है?
4. फॉलिंग वेज (Falling Wedge)
फॉलिंग वेज यह एक बुलिश पैटर्न है जो शुरूआत में चौड़ा (वाईड) होता है और बाद में सिकुड (कॉन्ट्रॅक्ट) जाता है क्योंकि इस पैटर्न में जैसे-जैसे भाव घटता है वैसे-वैसे ट्रेडिंग रेन्ज संकरी हो जाती है।
यह पैटर्न दो कन्वर्जिंग लाइन्स से तैयार होता है- अपर रेजिस्टन्स लाइन और लोअर सपोर्ट लाइन। यह दोनों लाइन्स इस प्रकार तैयार होती है कि वेज का स्लोप नीचे की दिशा में हो। यह दो कन्वर्जिंग लाइन्स संकेत देती है कि पैटर्न में दिखने वाली मंदी कम हो रही है, अर्थात घट रही है।
यदि यह पैटर्न अपट्रेन्ड में बनता है तो यह कन्टिन्यूएशन पैटर्न की तरह कार्य करता है और यदि यह पैटर्न डाउनट्रेन्ड में तैयार हुआ तो वह रिवर्सल पैटर्न कि तरह कार्य करता है। दोनों मामलों में, भाव ऊपर की दिशा में अपर रेजिस्टन्स लाइन को तोड़ते हुए नज़र आता है।
यह पैटर्न दर्शाता है कि वेज के भीतर भाव घटने के कारण, खरीदारों और विक्रेताओं के बीच रस्साकशी शुरू है और अंत में खरीदार बाजी मार लेते है और भाव वहाँ से ऊपर जाने की संभावना होती है।
मैंने अगले पन्ने पर दिखाया है कि यह पैटर्न कन्टिन्यूएश्न पैटर्न और रिवर्सल पैटर्न की तरह कैसे कार्य करता है।
भाव जब ऊपर की दिशा में अपर रेजिस्टन्स लाइन को तोड़ता है, तभी पैटर्न पूर्ण हुआ, ऐसा माना जाता है। उस समय सिक्योरिटी में लाँग एन्ट्री ली जाती है।
भाव जब अपर रेजिस्टन्स लाइन को तोड़ता है, तब वॉल्यूम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई तो पैटर्न को अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
इस पैटर्न के मामले में, टारगेट की गणना करने के लिए कोई तकनीक नहीं है। इसलिए इस पैटर्न के मामले में ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का उपयोग करने अथवा टारगेट निश्चित करने के लिए टेक्निकल एनालिसिस के अन्य टुल्स का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
इस पैटर्न में अपर रेजिस्टन्स लाइन के थोड़ा नीचे स्टॉप लॉस लगाया जाता है, जो ऊपर दिए गए चार्ट में दिखाया है।
5. सिमेट्रिकल ट्रायंगल (Symmetrical Triangle)
सिमेट्रिकल ट्राइऐंगल पैटर्न दो कन्वर्जिंग ट्रेन्डलाइन के द्वारा इस प्रकार से तैयार होता है कि उसमें दो कन्वर्जिंग ट्रेन्डलाइन होरिझोन्टल लाइन के संबंध में सिमेट्रिकल होता है।
यह पैटर्न कन्टिन्यूएशन पैटर्न या रिवर्सल पैटर्न हो सकता है। पिछला ट्रेन्ड कैसा था और ब्रेकआऊट के प्लेसमेन्ट के आधार पर वह तय होता है।
यह पैटर्न फॉलिंग ट्रेन्डलाइन (रेजिस्टन्स लाइन) और राइजिंग ट्रेन्डलाइन (सपोर्ट लाइन) के द्वारा इस प्रकार से तैयार होता है कि जिसमें दोनों ट्रेन्डलाइन एक निश्चित पॉइन्ट पर मिल जाती है और इस पैटर्न में कम से कम दो हायर लो और दो लोअर हाई तैयार होते है।
निष्कर्ष
न्यूट्रल चार्ट पैटर्न यह संकेत देता है कि बाजार किसी बड़े मूव की तैयारी कर रहा है। समझदारी से सपोर्ट-रेजिस्टेंस पहचानकर और ब्रेकआउट का इंतजार करके आप बेहतर ट्रेड ले सकते हैं।
ध्यान रखें — बिना कन्फर्मेशन के जल्दबाजी में एंट्री लेना नुकसानदायक हो सकता है।
FAQ
क्या न्यूट्रल चार्ट पैटर्न में ट्रेड करना सुरक्षित है?
हाँ, लेकिन सही कन्फर्मेशन और स्टॉप लॉस के साथ।
क्या यह पैटर्न हर टाइमफ्रेम में बनता है?
हाँ, 5 मिनट से लेकर डेली चार्ट तक।
ब्रेकआउट कैसे कन्फर्म करें?
मजबूत कैंडल, बढ़ता वॉल्यूम और पिछले हाई/लो का क्लियर ब्रेक।

0 Comments
Please don't spam here. All comments are reviewed by admin