ट्रेडिंग में लगातार मुनाफा कमाने के लिए मार्केट स्ट्रक्चर को समझना बेहद ज़रूरी है। इस ट्रेडिंग केस स्टडी सीरीज़ 02 में हम जानेंगे कि डाउन ट्रेंडिंग मार्केट (Downtrend Market) में किस तरह LL–LH (Lower Low – Lower High) स्ट्रक्चर की मदद से हाई-प्रोबेबिलिटी ट्रेड लिए जाते हैं।
दोस्तों आज यह हमारा ट्रेडिंग केस स्टडी सीरीज़ का पार्ट 2 है, डाउन ट्रेडिंग मार्केट में ट्रेडिंग (LL-LH स्ट्रक्चर)
नीचे बीएसई लिमिटेड का दैनिक चार्ट दर्शाया है। शेअर्स का ३ फरवरी २०१७ को लिस्टिंग होने के बाद का यह चार्ट है। उसमें भाव लोअर लो, लोअर हाई स्ट्रक्चर (LL-LH) बना रहा है।
- ट्रेडिंग केस स्टडी सीरीज़
- ट्रेडिंग केस स्टडी सीरीज़ 01 : अप ट्रेन्डिंग मार्केट में ट्रेडिंग (HH-HL स्ट्रक्चर)
१२०० के भाव से स्टॉक का लिस्टिंग होने के बाद, वह मार्च २०१८ तक ७२६ के स्तर पर आ गया था और बाद में बाऊन्स बैक करके वह जुलाई २०१८ में ८८१ के स्तर पर पहुँच गया, जो LL&LH स्ट्रक्चर को दर्शाता है।
यहाँ पर बेअरीश एन्गल्फिंग पैटर्न तैयार हुआ था, जो बेअरीश ट्रेन्ड रिवर्सल का संकेत देता है। भाव भी ५० दिनों के मूविंग एवरेज के नीचे था, जिससे अधिक बेअरीश कन्फर्मेशन मिलता है।
८२६.७० (बेअरीश एन्गल्फिंग पैटर्न के लो) के नीचे शॉर्ट पोजिशन ली जाती है और स्टॉप लॉस को ८८१ (बेयरिश एनगल्फिंग के हाई) के ऊपर लगाकर शुरूआती टारगेट ७२६ के नीचे अर्थात पिछले लोअर लो के स्तः के नीचे रखा जाता है।
शॉर्ट पोजिशन लेने के बाद, शेअर्स का भाव उम्मीद के मुताबिक नीचे आने लगा और उसमें अच्छी गिरावट देखने को मिली। नीचे दिए गए चार्ट में यह दर्शाया है।
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| LL&LH स्ट्रक्चर |
हमेशा याद रखें, आप LL&LH स्ट्रक्चर के आधार पर किसी भी सिक्योरिटी में ट्रेड करते हो तब आपको अपना स्टॉप लॉस लगातार घटाते रहना चाहिए और इस प्रक्रिया के दौरान यदि स्टॉक नया लोअर लो और लोअर हाई बनाता है तो आपको अपना स्टॉप लॉस पिछले स्विंग हाई पर शिफ्ट करना चाहिए, जो चार्ट में लोअर हाई (LH) के रूप में दर्शाया है।
जब तक आपके नजदीक का स्विंग हाई टुटता नहीं, तब तक आपको शॉर्ट पोजिशन में से बाहर नहीं निकलना चाहिए और अपने स्टॉप लॉस को नीचे की दिशा में ट्रेल करते रहना चाहिए और डाउनसाइड प्रॉफिट को लॉक करना चाहिए।
FAQs
1. क्या डाउनट्रेंड में Buy करना सही है?
सिर्फ शॉर्ट-टर्म स्कैल्पिंग के लिए, लेकिन स्विंग ट्रेडिंग में Avoid करें।
2. LL-LH स्ट्रक्चर कब टूटता है?
जब मार्केट Higher High और Higher Low बनाना शुरू कर दे।
3. क्या इंडिकेटर जरूरी हैं?
नहीं, LL-LH स्ट्रक्चर खुद में एक मजबूत प्राइस एक्शन टूल है।
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